गुरुवार, 7 फ़रवरी 2013

valentine Story Soni-Santosh

                       प्यार जिसका नाम सुनते ही पूरे शरीर मे गुदगुदी सी होने लगती है ।  पर यह दर्द मीठा दर्द मुझे कब होंगा इसका इंतजार मै बचपन से ही था । हम भारतीय संस्कृति वाले  स्कूल में पढ़ रहे थे । जंहा साथ के लड़के - लडकियों को भाई -बहन के रूप से संभोदित किया जाता था । मूझे यह बिलकुल भी पसंद नहीं था पर .....हाय रे मज़बूरी
                      खैर  उस स्कूल से पीछा छुटा । मै  प्यार में पड़ने के तैयार हो गया । मेरे पापा - मम्मी को इस बात की भनक भी नहीं थी ...वो गाना है ना "पापा कहते है बड़ा नाम करेंगा " । हर लकडी में मुझे कुछ ना कुछ या बहुत कुछ पसंद आ ही जाता था । कोई खुबसूरत लड़की देखी तो मुझे ऐसा लगता था की वो मेरे लिए ही बनी है । बात हमेशा अधूरी रह जाती कभी मेरी तरफ से तो कभी उसकी तरफ से । मुझ में कभी इतनी हिम्मत नहीं थी कि किसी से अपने दिल की बातो का इजहार कर सकू । खैर मै ख़याली पुलाव बनाकर ही ख़ुश हो जाता था । दोस्ती और करिएर बनाने के चक्रव्हिउ में फस कर पल बीत रहे थे । अब शादी की बात घर में होने लगी और जिंदिगी में फिर से नया मोड आया । कहते है "राम मिलाय जोड़ी " और सच है मैंने काफ़ी लडकिया देखी पर ..
                      आखिरकार वो दिन आ ही गया मै और मम्मी लड़की वालो के घर पहुंचे ।काफी अच्छी खातिर- दारी  की गई पर मूझे तो किसी और में ही इंटरेस्ट था । और पहले बार इक अपनापन लगा उसे देख कर , मेरे परिवार और उसके परिवार वाले साथ में होने के कारण मै उसे अच्छी तरह देख नहीं पा रहा था ।
उफ़ शायद उसके साथ भी यह कशमकश थी । मम्मी ने कहा बेटा मिठाई लो तब मैंने भी कह दिया सोनी से की आप भी लो " हाँ " वो का नाम " सोनी " है । सोनी ने साफ़ इनकार कर दिया कि उसका  मिठाई से पंगा है उसेमीठा बिलकुल पसंद नहीं था ।पर उसकी मिठाई से भी मिठी बोली से मै मुस्कुराने लगा उसे नहीं पता था की मुझे उसकी आवाज़ बहुत अच्छी लगी ।उसका रूप रंग से ...और सारी बाते अच्छी लगने लगी । परिवार वाले आपस में बाते कर रहे थे । पर मुझे उससे अकले मिलने का इंतजार था । बातो ही बातो में यह बात भी निकल गई और मई की गर्मी में हम इक कूलर वाले कमरे में चले गए । वैसे तो मेरे मम्मी पापा बहुत शक्त है पर उनेह भी कोई ऐतराज नहीं हुआ ।हम दोनों में काफ़ी बात चीत  हुई , कुछ समझदारी और कुछ बेवकूफी वाली ।
हम दोनों में कोई भी ऐसी बात नहीं थी की जो इक दुसरे से मेल खाए तो भी सब कुछ अच्छा लग रहा था ।
"पहला नशा पहला खुमा ...." गाने का सही मतलब समझ आया । और मुझे प्यार हो गया मैंने उसी समय शादी  के लिए हाँ कर दी । वक़्त जल्दी -जल्दी बीत रहा था । क्यों ईक मिनट में 12000 सेकंड नहीं  होते ? मेरे परिवार वालो ने उसके परिवालो के सामने बात रख दी । और उनकी तरफ से भी हाँ हुआ । पल थम सा गया ...मेरी नजरें उसे ढूढने लगी पर सोनी जी तो सामने आने का नाम नहीं ले रही थी .।
फ़िर मैंने फ़ोटो के बहाने उसके कमरे में चला गया ...वो बहुत हैरान परेशान ..और शर्माने लगी । अब हमारें निकलने का वक़्त हो गया ।कार मे जाते समय मैंने छत पर देख तो वो मुझे बाय करने के लिए खड़ी थी ...उसके   मम्मी पापा को नहीं पता था । पर मेरी नज़रों से सबको पता चल गया । सारा माहोल खुश्नुमा हो गया । प्यार की शुरुवात अब हो गई । ..."प्यार का दर्द है मीठा मीठा :) "
                   घर आने पर  मै उसके ख्याबों में डूबा हुआ था ।चलो दुसरे दिन मै वापस मुंबई आ गया ।मेरा परिवार सक्त होने के कारण मुझे पता था की बात चीत बड़ी मुश्किल थी । पर मुम्बई आते ही उसका कॉल आया उसकी मीठी आवाज़ सुनते ही मेरी ख़ुशी का  ठिकाना नहीं रहा ।सगाई के पहले मैंने उससे फ़िल्मी अंदाज में इजहार किया । और फिर सगाई ....आज हम पति -पत्नी है ....और रोज पहले दिन वाला झगड़ा करतें है । ...