सोमवार, 26 अगस्त 2013

अरमान दिल के जब



कुछ तो होंगा उसकी आखों में ।

इस कदर तो  कोई खामोश नहीं होता ।

नफरत प्यार हो जाये जब किसी से

इन्सान सोचने के लायक नहीं होता ।

कहते है कोशिश करने वालों की हार  नहीं होती ,

पर ये भी सच है हर किसी की कश्ती पार नहीं होती ।

फिर भी है इंतजार में नजरे बिछाये हम ।

अगर मंजिल तक ना पहुचे पायें  कदम

तो किसी का रास्ता ही बन जाये हम ।

------------------------------------------------------------------------------------लेखख  संतोष शर्मा






रविवार, 25 अगस्त 2013

खूबसूरत तोफ़हा

नजरे मिलिती है ,
    तो अश्क भी आतें है ।

पर  सोचा नहीं किसी ने
    पर सोचा नहीं किसी ने,

ये  खारे क्यों हो जाते है,
   शायर ने नहीं बताया
       महफ़िल में न जान पाया ।

शायद  ये समजाने
   ये खूबसूरत तोफ़हा   हमारी आँखों में भी आया


------------------------------------------------------------------------------  संतोष शर्मा

गुरुवार, 7 फ़रवरी 2013

valentine Story Soni-Santosh

                       प्यार जिसका नाम सुनते ही पूरे शरीर मे गुदगुदी सी होने लगती है ।  पर यह दर्द मीठा दर्द मुझे कब होंगा इसका इंतजार मै बचपन से ही था । हम भारतीय संस्कृति वाले  स्कूल में पढ़ रहे थे । जंहा साथ के लड़के - लडकियों को भाई -बहन के रूप से संभोदित किया जाता था । मूझे यह बिलकुल भी पसंद नहीं था पर .....हाय रे मज़बूरी
                      खैर  उस स्कूल से पीछा छुटा । मै  प्यार में पड़ने के तैयार हो गया । मेरे पापा - मम्मी को इस बात की भनक भी नहीं थी ...वो गाना है ना "पापा कहते है बड़ा नाम करेंगा " । हर लकडी में मुझे कुछ ना कुछ या बहुत कुछ पसंद आ ही जाता था । कोई खुबसूरत लड़की देखी तो मुझे ऐसा लगता था की वो मेरे लिए ही बनी है । बात हमेशा अधूरी रह जाती कभी मेरी तरफ से तो कभी उसकी तरफ से । मुझ में कभी इतनी हिम्मत नहीं थी कि किसी से अपने दिल की बातो का इजहार कर सकू । खैर मै ख़याली पुलाव बनाकर ही ख़ुश हो जाता था । दोस्ती और करिएर बनाने के चक्रव्हिउ में फस कर पल बीत रहे थे । अब शादी की बात घर में होने लगी और जिंदिगी में फिर से नया मोड आया । कहते है "राम मिलाय जोड़ी " और सच है मैंने काफ़ी लडकिया देखी पर ..
                      आखिरकार वो दिन आ ही गया मै और मम्मी लड़की वालो के घर पहुंचे ।काफी अच्छी खातिर- दारी  की गई पर मूझे तो किसी और में ही इंटरेस्ट था । और पहले बार इक अपनापन लगा उसे देख कर , मेरे परिवार और उसके परिवार वाले साथ में होने के कारण मै उसे अच्छी तरह देख नहीं पा रहा था ।
उफ़ शायद उसके साथ भी यह कशमकश थी । मम्मी ने कहा बेटा मिठाई लो तब मैंने भी कह दिया सोनी से की आप भी लो " हाँ " वो का नाम " सोनी " है । सोनी ने साफ़ इनकार कर दिया कि उसका  मिठाई से पंगा है उसेमीठा बिलकुल पसंद नहीं था ।पर उसकी मिठाई से भी मिठी बोली से मै मुस्कुराने लगा उसे नहीं पता था की मुझे उसकी आवाज़ बहुत अच्छी लगी ।उसका रूप रंग से ...और सारी बाते अच्छी लगने लगी । परिवार वाले आपस में बाते कर रहे थे । पर मुझे उससे अकले मिलने का इंतजार था । बातो ही बातो में यह बात भी निकल गई और मई की गर्मी में हम इक कूलर वाले कमरे में चले गए । वैसे तो मेरे मम्मी पापा बहुत शक्त है पर उनेह भी कोई ऐतराज नहीं हुआ ।हम दोनों में काफ़ी बात चीत  हुई , कुछ समझदारी और कुछ बेवकूफी वाली ।
हम दोनों में कोई भी ऐसी बात नहीं थी की जो इक दुसरे से मेल खाए तो भी सब कुछ अच्छा लग रहा था ।
"पहला नशा पहला खुमा ...." गाने का सही मतलब समझ आया । और मुझे प्यार हो गया मैंने उसी समय शादी  के लिए हाँ कर दी । वक़्त जल्दी -जल्दी बीत रहा था । क्यों ईक मिनट में 12000 सेकंड नहीं  होते ? मेरे परिवार वालो ने उसके परिवालो के सामने बात रख दी । और उनकी तरफ से भी हाँ हुआ । पल थम सा गया ...मेरी नजरें उसे ढूढने लगी पर सोनी जी तो सामने आने का नाम नहीं ले रही थी .।
फ़िर मैंने फ़ोटो के बहाने उसके कमरे में चला गया ...वो बहुत हैरान परेशान ..और शर्माने लगी । अब हमारें निकलने का वक़्त हो गया ।कार मे जाते समय मैंने छत पर देख तो वो मुझे बाय करने के लिए खड़ी थी ...उसके   मम्मी पापा को नहीं पता था । पर मेरी नज़रों से सबको पता चल गया । सारा माहोल खुश्नुमा हो गया । प्यार की शुरुवात अब हो गई । ..."प्यार का दर्द है मीठा मीठा :) "
                   घर आने पर  मै उसके ख्याबों में डूबा हुआ था ।चलो दुसरे दिन मै वापस मुंबई आ गया ।मेरा परिवार सक्त होने के कारण मुझे पता था की बात चीत बड़ी मुश्किल थी । पर मुम्बई आते ही उसका कॉल आया उसकी मीठी आवाज़ सुनते ही मेरी ख़ुशी का  ठिकाना नहीं रहा ।सगाई के पहले मैंने उससे फ़िल्मी अंदाज में इजहार किया । और फिर सगाई ....आज हम पति -पत्नी है ....और रोज पहले दिन वाला झगड़ा करतें है । ...





सोमवार, 21 जनवरी 2013

इक पल

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देखा उसे सोचा अभी .
होंगी उनसे मुलाकात कभी ।

इस बात से

इस बात से यारों सुबह हुई .
सुबह से फिर तो शाम हुई .......
शाम से फिर तो रात हुई ।

ये रात हमेशा रात रही ।
बेकार की सारी बात रही ।।

=============================संतोष शर्मा

जब वो साथ नहीं


जब वो साथ नहीं

मुश्किल  है कितना खुद को समझाना ,
दूर रहकर तुझ से मुस्कुराना ।

नजरें भी देखती  है झूठी तक़दीर ,
देखता हूँ खुद को नजर आएं उसकी तसवीर ।।

=========================================संतोष शर्मा

होता हूँ फुर्सत में

होता हूँ फुर्सत में ।

अंधेरे में जैसे रौशनी समाई ।
कागज़ के फूलों  से खुशबू सी आई ।।

यादों की महफ़िल में रहतें थे ज़ो कल ।
तन्हाई के आलम में कहतें है वों पल ।।

दूर नहीं है वो मुझसे  मान ले मेरे दिल ।
....
नहीं यंकी तो .....
बंद कर पलके और उनसे मिल ।।

+++++++++++++++++++++++++++++++++++++++संतोष शर्मा

शनिवार, 19 जनवरी 2013

नन्हा मुन्ना राही

नन्हा मुन्ना राही हूँ । देश का शिपाही हूँ ।

बोलो मेरे संग ..................:)


मुन्नी बदनाम  हुई डार्लिंग तेरे लिए  ।
शीला की जवानी डार्लिंग तेरे लिए  ।

सॉरी ...

जय हिन्द , जय हिन्द

बड़ा होकर देश का कुंवारा (सहारा) बनूगा ।
आगे ही आगे बडाऊँगा कदम ।








मंगलवार, 15 जनवरी 2013

AARAM

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पलक झपकते ही जिस के शाम होती है |
 होठ खुलते ही सारी कोशिश नाकाम होती है || 
बातें उसकी इतनी प्यारी सी | 
हर पल नई उमंगें जवान होती हैं "||

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बड़ी दी

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शेरनी   की  सी  होती आवाज़
कोई हो साथ तो दबते नहीं जस्बात ।।

बिल्ली से भी डर जाए वो ।
जब अँधरे में जाएँ वो ।।

किस्से उसके अलग ही रहते है ।
ग्रुप में सब उसे कहर कहते है ।।

गुस्सा जब उसे आता है ।
होम-एप्लायंसेस का दिल दहल जाता है ।।
रोने को जब वो आती है ।
बालटी भर ले कोई इतने आंसू बहाती है ।।


मुश्किल में हमेशा , बड़े प्यार से समझाती है ।
दूर है मुझसे पर बड़ी दी
..............................हर पल याद आती है ।।
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सोमवार, 14 जनवरी 2013

Ik pal ki Chahat

Converted in DEVNAGARI

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जुबां  का कहने में क्या जाता है ,
फिर भी दिल में य़ेः ख्याल आता है ।।
 .
कि शायद
की  शायद वो मुड़कर देखे ,
की  शायद शायद वो बात करें,

तन्हाई में हमेशा ... वो हमको याद करें ।।

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SaF Safai

मेरी बीबी    बड़ी  नादानं ।
करती  सुबह शाम वो काम ।

नहीं करने देती किसी को भी , आराम ।।

सुबह सुबह  जब वो देखे "डस्ट-बिन "  को

सपने उसके हो जाये  अंगूर से आम

दिल दहल जाये उसका

जोर जोर चिल्लाये त्राहिमाम  त्राहिमाम ।।