कैसी -कैसी ख्वाईशे है ,
कैसे तुम्हे समझाये
मै शर्मा सा जाता हूँ,
जब शब्द जुंभा पे आये।
उसकी बाहों में खो जाऊं,
या
आँचल में मै सो जाऊं
उसके होठों को छू लूँ ,
या
उसकी नैनो से पी लूं।
उसके मस्तक की बिंदिया ,
मेरी दुनिया सारी।
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