शुक्रवार, 21 फ़रवरी 2014

प्यार न्यू स्टाइल

प्यार मोह्बत्त क्या है यार ,
        येः है दो धारी तलवार।
समझ में इसके आतें ही ,
       मती मारी जाएँ सरकार।

ढ़ाई अछर प्रेम का ,
      पढ़े सो पंडित होये।
इस पण्डिताई में ,
      देर करें ना क़ोई।

पंडिताई की इस गाथा को ,
  जिसने किया प्रणाम ,
फिर तो "सनी लीओन " के
  सपनो में गुज़रे सुबह शाम |


अब तो मम्मी पापा ,
     बस इतना देखें यार।
सेम सेक्स में मुण्डा ,
     कर न बैठें प्यार।

शेर भी बन जाये चूहा ,
     देख़ येः महफ़िल।
करने गया शिकार ,
     छोड़ आया दिल।

प्यार मोहब्बत की बातें ,
    होती कँहा सच्ची ।
झूठ मुठ की बातो में
    खो जाएँ तंदुरस्ती ।


इतने पर भी यारों ,
    ख़तम न हो मुश किल।
करते ही इजहारे इश्क़ ,
    पारियाँ जाती हैं मिल ।

बहुत कुछ बोल गया मैं ,
    अब् बिंदु पर आता हूँ ।
माँ का नाम ना हो बदनाम
    ऐसा प्यार मैं चाहता हूँ।

###################  कवि  संतोष शर्मा (स्तभ्त)










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