प्यार मोह्बत्त क्या है यार ,
येः है दो धारी तलवार।
समझ में इसके आतें ही ,
मती मारी जाएँ सरकार।
ढ़ाई अछर प्रेम का ,
पढ़े सो पंडित होये।
इस पण्डिताई में ,
देर करें ना क़ोई।
पंडिताई की इस गाथा को ,
जिसने किया प्रणाम ,
फिर तो "सनी लीओन " के
सपनो में गुज़रे सुबह शाम |
अब तो मम्मी पापा ,
बस इतना देखें यार।
सेम सेक्स में मुण्डा ,
कर न बैठें प्यार।
शेर भी बन जाये चूहा ,
देख़ येः महफ़िल।
करने गया शिकार ,
छोड़ आया दिल।
प्यार मोहब्बत की बातें ,
होती कँहा सच्ची ।
झूठ मुठ की बातो में
खो जाएँ तंदुरस्ती ।
इतने पर भी यारों ,
ख़तम न हो मुश किल।
करते ही इजहारे इश्क़ ,
पारियाँ जाती हैं मिल ।
बहुत कुछ बोल गया मैं ,
अब् बिंदु पर आता हूँ ।
माँ का नाम ना हो बदनाम
ऐसा प्यार मैं चाहता हूँ।
################### कवि संतोष शर्मा (स्तभ्त)
येः है दो धारी तलवार।
समझ में इसके आतें ही ,
मती मारी जाएँ सरकार।
ढ़ाई अछर प्रेम का ,
पढ़े सो पंडित होये।
इस पण्डिताई में ,
देर करें ना क़ोई।
पंडिताई की इस गाथा को ,
जिसने किया प्रणाम ,
फिर तो "सनी लीओन " के
सपनो में गुज़रे सुबह शाम |
अब तो मम्मी पापा ,
बस इतना देखें यार।
सेम सेक्स में मुण्डा ,
कर न बैठें प्यार।
शेर भी बन जाये चूहा ,
देख़ येः महफ़िल।
करने गया शिकार ,
छोड़ आया दिल।
प्यार मोहब्बत की बातें ,
होती कँहा सच्ची ।
झूठ मुठ की बातो में
खो जाएँ तंदुरस्ती ।
इतने पर भी यारों ,
ख़तम न हो मुश किल।
करते ही इजहारे इश्क़ ,
पारियाँ जाती हैं मिल ।
बहुत कुछ बोल गया मैं ,
अब् बिंदु पर आता हूँ ।
माँ का नाम ना हो बदनाम
ऐसा प्यार मैं चाहता हूँ।
################### कवि संतोष शर्मा (स्तभ्त)
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