हमेशा से नारी पर तरह - तरह के अत्त्याचार हुए , होते है , और मुझे ऐसा प्रतीत होता हैं की इस की संख्य़ा बढ़ती ही रहेंगी |
क्यों ...?
क्यों की कमजोर को जीने का अधिकार नहीं है , दुसरो के लिए जीने के लिए मरने का भले हो |
सभी नारियों को अब मजबूत इरादा रखना होंगा , बगावत करना होंगा , आक्रमण ही बचाव का सबसे अच्छा
तरीका है .... यह समज़ना होंगा ...
मेरी इस कविता से मै कुछ सोच जगाना चाहता हूँ | और अच्छी लगे तो हर नारी तक पहुँचाने का सह:योग करे |
जिस दिन नारी खंजर ले ,
सीने पर चढ़ जायँगी ।
उस दिन किस पापी की नजरें,
चीर - हरण कर पायेंगी ।
रंग बिरंगे नख , जब ,
आँखो में गड़ जाएंगे।
उस दिन जुल्मी नापाक ईरादे ,
सीने में सड़ जाएंगे।
मृद भाषी बलाए जब ,
बोटी काट क़े खाएंगी।
उस दिन हैवानों कि
रूह कॉप फिर जायँगी।
जिस दिन तन - मन , संकट पर
घुटने टेक झुक जायेंगा।
उस दिन चमत्कार भी ,समझो
बेअसर हो जायेंगा।
लड़ने का जस्बा हो तो ,
पत्थर भी बम बन जाता है।
ऐसे तो हतियार हाथ में
फ़ूलों सा रह जाता है।
स्वाभिमान की रक्षा पर ,
तूम्हे क्रूर बन जाना होंगा |
अबला न बन ,
पापियों पर बला बन जाना होंगा |
जिस दिन मेनिका का ,
काली में परिवर्तन होंगा |
उस दिन सच में ,
नारी का "जन गण मन " होंगा |
पाक कला में निपुण , हाथो से
चीर फाड़ कर जाना होंगा |
निर्भय हो कर रण-भूमि में ,
वरिंगाना कहलाना होंगा |
====================संतोष शर्मा (स्तभ्त )
क्यों ...?
क्यों की कमजोर को जीने का अधिकार नहीं है , दुसरो के लिए जीने के लिए मरने का भले हो |
सभी नारियों को अब मजबूत इरादा रखना होंगा , बगावत करना होंगा , आक्रमण ही बचाव का सबसे अच्छा
तरीका है .... यह समज़ना होंगा ...
मेरी इस कविता से मै कुछ सोच जगाना चाहता हूँ | और अच्छी लगे तो हर नारी तक पहुँचाने का सह:योग करे |
जिस दिन नारी खंजर ले ,
सीने पर चढ़ जायँगी ।
उस दिन किस पापी की नजरें,
चीर - हरण कर पायेंगी ।
रंग बिरंगे नख , जब ,
आँखो में गड़ जाएंगे।
उस दिन जुल्मी नापाक ईरादे ,
सीने में सड़ जाएंगे।
मृद भाषी बलाए जब ,
बोटी काट क़े खाएंगी।
उस दिन हैवानों कि
रूह कॉप फिर जायँगी।
जिस दिन तन - मन , संकट पर
घुटने टेक झुक जायेंगा।
उस दिन चमत्कार भी ,समझो
बेअसर हो जायेंगा।
लड़ने का जस्बा हो तो ,
पत्थर भी बम बन जाता है।
ऐसे तो हतियार हाथ में
फ़ूलों सा रह जाता है।
स्वाभिमान की रक्षा पर ,
तूम्हे क्रूर बन जाना होंगा |
अबला न बन ,
पापियों पर बला बन जाना होंगा |
जिस दिन मेनिका का ,
काली में परिवर्तन होंगा |
उस दिन सच में ,
नारी का "जन गण मन " होंगा |
पाक कला में निपुण , हाथो से
चीर फाड़ कर जाना होंगा |
निर्भय हो कर रण-भूमि में ,
वरिंगाना कहलाना होंगा |
====================संतोष शर्मा (स्तभ्त )
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