सोमवार, 21 जनवरी 2013

होता हूँ फुर्सत में

होता हूँ फुर्सत में ।

अंधेरे में जैसे रौशनी समाई ।
कागज़ के फूलों  से खुशबू सी आई ।।

यादों की महफ़िल में रहतें थे ज़ो कल ।
तन्हाई के आलम में कहतें है वों पल ।।

दूर नहीं है वो मुझसे  मान ले मेरे दिल ।
....
नहीं यंकी तो .....
बंद कर पलके और उनसे मिल ।।

+++++++++++++++++++++++++++++++++++++++संतोष शर्मा

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