होता हूँ फुर्सत में ।
अंधेरे में जैसे रौशनी समाई ।
कागज़ के फूलों से खुशबू सी आई ।।
यादों की महफ़िल में रहतें थे ज़ो कल ।
तन्हाई के आलम में कहतें है वों पल ।।
दूर नहीं है वो मुझसे मान ले मेरे दिल ।
....
नहीं यंकी तो .....
बंद कर पलके और उनसे मिल ।।
+++++++++++++++++++++++++++++++++++++++संतोष शर्मा
अंधेरे में जैसे रौशनी समाई ।
कागज़ के फूलों से खुशबू सी आई ।।
यादों की महफ़िल में रहतें थे ज़ो कल ।
तन्हाई के आलम में कहतें है वों पल ।।
दूर नहीं है वो मुझसे मान ले मेरे दिल ।
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नहीं यंकी तो .....
बंद कर पलके और उनसे मिल ।।
+++++++++++++++++++++++++++++++++++++++संतोष शर्मा
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