+++++++++++++++++++++++++++++
देखा उसे सोचा अभी .
होंगी उनसे मुलाकात कभी ।
इस बात से
इस बात से यारों सुबह हुई .
सुबह से फिर तो शाम हुई .......
शाम से फिर तो रात हुई ।
ये रात हमेशा रात रही ।
बेकार की सारी बात रही ।।
=============================संतोष शर्मा
देखा उसे सोचा अभी .
होंगी उनसे मुलाकात कभी ।
इस बात से
इस बात से यारों सुबह हुई .
सुबह से फिर तो शाम हुई .......
शाम से फिर तो रात हुई ।
ये रात हमेशा रात रही ।
बेकार की सारी बात रही ।।
=============================संतोष शर्मा
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें